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जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

राधा-कृष्ण विवाह

राधा-कृष्ण विवाह |Radha Krishna Vivah हम में से बहुत से लोग यही जानते हैं कि राधाजी श्रीकृष्ण की प्रेयसी थीं परन्तु इनका विवाह नहीं हुआ था। श्रीकृष्ण के गुरू गर्गाचार्य जी द्वारा रचित “गर्ग संहिता” में यह वर्णन है कि राधा-कृष्ण का विवाह हुआ था। एक बार नन्द बाबा कृष्ण जी को गोद में लिए

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कर्ण की दानवीरता

कर्ण की दानवीरता | Karan Ki Daanveerta महाभारत के युद्ध का सत्रहवां दिन समाप्त हो गया था| महारथी कर्ण रणभूमि में गिर चुके थे| पांडव-शिविर में आनंदोत्सव हो रहा था| ऐसे उल्लास के समय श्रीकृष्ण खिन्न थे| वे बार-बार कर्ण की प्रशंसा कर रहे थे, “आज पृथ्वी से सच्चा दानी उठ गया|” धर्मराज युधिष्ठिर के

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गणेशजी की पौराणिक कथा

गणेशजी की पौराणिक कथा | Ganesh Katha  पौराणिक कथा-1 : एक समय जब माता पार्वती मानसरोवर में स्नान कर रही थी तब उन्होंने स्नान स्थल पर कोई आ न सके इस हेतु अपनी माया से गणेश को जन्म देकर ‘बाल गणेश’ को पहरा देने के लिए नियुक्त कर दिया। इसी दौरान भगवान शिव उधर आ

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शिव विवाह की कथा

शिव विवाह की कथा | Shiv Vivah सती के विरह में शंकरजी की दयनीय दशा हो गई। वे हर पल सती का ही ध्यान करते रहते और उन्हीं की चर्चा में व्यस्त रहते। उधर सती ने भी शरीर का त्याग करते समय संकल्प किया था कि मैं राजा हिमालय के यहाँ जन्म लेकर शंकरजी की

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दुष्यंत एवं शकुन्तला की कथा

दुष्यंत एवं शकुन्तला की कथा | Dushyanth Shakuntala Story एक बार हस्तिनापुर नरेश दुष्यंत आखेट खेलने वन में गये। जिस वन में वे शिकार के लिये गये थे उसी वन में कण्व ऋषि का आश्रम था। कण्व ऋषि के दर्शन करने के लिये महाराज दुष्यंत उनके आश्रम पहुँच गये। पुकार लगाने पर एक अति लावण्यमयी

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जब टूटा शनिदेव का अंहकार(पिप्पलाद की कथा)

शनिदेव का अंहकार(पिप्पलाद की कथा) | Shani Aahamkar (Pipalaad Story) त्रेतायुग में एक बार बारिश के अभाव से अकाल पड़ा। तब कौशिक मुनि परिवार के लालन-पालन के लिए अपना गृहस्थान छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ चल दिए। फिर भी परिवार का भरण-पोषण कठिन होने पर दु:खी होकर उन्होनें अपने

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मायावी घटोत्कच

मायावी घटोत्कच | Ghatotkach भीमसेन का विवाह हिडिंबा नाम की एक राक्षसी के साथ भी हुआ था| वह भीमसेन पर आसक्त हो गई थी और उसने स्वयं आकर माता कुंती से प्रार्थना की थी कि वे उसका विवाह भीमसेन के साथ करा दें| कुंती ने उस विवाह की अनुमति दे दी, लेकिन भीमसेन ने विवाह

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बजरंगबली और भीम की कथा – Story of Hanuman Ji

बजरंगबली की कथा – Hanuman Katha Hindi आज हनुमान कथा (hanuman story) में आपको भीम के मान मर्दन की कहानी बताएँगे जी हां हनुमान जी की कथा (story of hanuman ji) उस समय की है जब भीम अपने पांडव भाइयो सहित अज्ञातवास पर निकले थे और उन्हें अपनी भुजाओ के बल पर अत्यधिक अहंकार हो

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शनि की महत्ता

शनि की महत्ता | Shani Katha एक समय स्वर्गलोक में सबसे बड़ा कौन के प्रश्न को लेकर सभी देवताओं में वाद-विवाद प्रारम्भ हुआ और फिर परस्पर भयंकर युद्ध की स्थिति बन गई। सभी देवता देवराज इंद्र के पास पहुंचे और बोले, हे देवराज! आपको निर्णय करना होगा कि नौ ग्रहों में सबसे बड़ा कौन है?

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जब हनुमान से हारे शनि

हनुमान से हारे शनि | Hunuman Se Hare Shanidev शनि के नाम से ही हर व्यक्ति डरने लगता है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो साढ़ेसात साल बाद ही पीछा छोड़ती है। लेकिन हनुमान भक्तों को शनि से डरने की तनिक भी जरूरत नहीं। शनि ने हनुमान को भी डराना चाहा लेकिन

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भगवान विष्णु जी और नारद मुनि जी

भगवान विष्णु जी और नारद मुनि जी | Vishnu and Narad एक बार नारद मुनि जी ने भगवान विष्णु जी से पुछा, हे भगवन आप का इस समय सब से प्रिया भगत कोन है?, अब विष्णु तो भगवान है, सो झट से समझ गये अपने भगत नराद मुनि की बात, ओर मुस्कुरा कर वोले !

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अभिमन्यु कथा | शौर्य का प्रतिरूप अभिमन्यु

अभिमन्यु कथा | Abhimanyu Katha अभिमन्यु अर्जुन का पुत्र था| श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा इनकी माता थी| यह बालक बड़ा होनहार था| अपने पिता के-से सारे गुण इसमें विद्यमान थे| स्वभाव का बड़ा क्रोधी था और डरना तो किसी से इसने जाना ही नहीं था| इसी निर्भयता और क्रोधी स्वभाव के कारण इसका नाम अभि

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एकलव्य की गुरुभक्ति

एकलव्य की गुरुभक्ति | Eklawya Gurubhakti आचार्य द्रोण राजकुमारों को धनुर्विद्या की विधिवत शिक्षा प्रदान करने लगे। उन राजकुमारों में अर्जुन के अत्यन्त प्रतिभावान तथा गुरुभक्त होने के कारण वे द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्य थे। द्रोणाचार्य का अपने पुत्र अश्वत्थामा पर भी विशेष अनुराग था इसलिये धनुर्विद्या में वे भी सभी राजकुमारों में अग्रणी थे,

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सम्पूर्ण श्रीरामचरितमानस सुन्दरकाण्ड पाठ

  सम्पूर्ण श्रीरामचरितमानस सुन्दरकाण्ड पाठ श्लोक शान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम् । रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम्॥१॥ नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीये सत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा। भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मे कामादिदोषरहितं कुरु मानसं च॥२॥ अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥३॥ जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय

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भगवान परशुराम द्वारा २१ बार क्षत्रियो का संहार

भगवान परशुराम द्वारा २१ बार क्षत्रियो का संहार | Parsuram Dwara Kshtriyo ka Samhar भगवान परशुराम को भगवन विष्णु का छठवां अवतार माना जाता हैं।  भगवान परशुराम के बारे में यह प्रसिद्ध है कि उन्होंने तत्कालीन अत्याचारी और निरंकुश क्षत्रियों का 21 बार संहार किया। लेकिन क्या आप जानते हैं भगवान परशुराम ने आखिर ऐसा