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जाने माला के प्रकार, माला जपने का सही तरीका, नियम और फायदे-By Your Astrology Guru

भक्ति योग – Bhakti Yoga – गीता अध्याय -12

भक्ति योग – Bhakti Yoga  भक्ति योग गीता के अनुसार – गीता अध्याय 12 – Bhagavad Gita Bhakti Yoga साकार और निराकार के उपासकों की उत्तमता का निर्णय और भगवत्प्राप्ति के उपाय का विषय –  अर्जुन उवाच एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते । ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः ॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- जो अनन्य प्रेमी

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विश्वरूप दर्शन योग – Vishwa Roop Darshan Yoga – गीता अध्याय -11

गीता अध्याय -11 विश्वरूप दर्शन योग – Vishwa Roop Darshan Yoga अर्जुन उवाच मदनुग्रहाय परमं गुह्यमध्यात्मसञ्ज्ञितम्‌ । यत्त्वयोक्तं वचस्तेन मोहोऽयं विगतो मम ॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- मुझ पर अनुग्रह करने के लिए आपने जो परम गोपनीय अध्यात्म विषयक वचन अर्थात उपदेश कहा, उससे मेरा यह अज्ञान नष्ट हो गया है॥1॥ भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो

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विभूति योग – Vibhuti Yoga – गीता अध्याय -10

गीता अध्याय -10 विभूति योग – Vibhuti Yoga श्रीभगवानुवाच भूय एव महाबाहो श्रृणु मे परमं वचः । यत्तेऽहं प्रीयमाणाय वक्ष्यामि हितकाम्यया ॥  भावार्थ : श्री भगवान्‌ बोले- हे महाबाहो! फिर भी मेरे परम रहस्य और प्रभावयुक्त वचन को सुन, जिसे मैं तुझे अतिशय प्रेम रखने वाले के लिए हित की इच्छा से कहूँगा॥1॥ न मे विदुः

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राजविद्या राजगुह्य योग – Rajvidya Rajgruha Yoga – गीता अध्याय -9

गीता अध्याय -9 राजविद्या राजगुह्य योग – Rajvidya Rajgruha Yoga श्रीभगवानुवाच इदं तु ते गुह्यतमं प्रवक्ष्याम्यनसूयवे । ज्ञानं विज्ञानसहितं यज्ज्ञात्वा मोक्ष्यसेऽशुभात्‌ ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- तुझ दोषदृष्टिरहित भक्त के लिए इस परम गोपनीय विज्ञान सहित ज्ञान को पुनः भली भाँति कहूँगा, जिसको जानकर तू दुःखरूप संसार से मुक्त हो जाएगा॥1॥ राजविद्या राजगुह्यं पवित्रमिदमुत्तमम्‌ ।

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गीता अध्याय -8

गीता अध्याय -8 अक्षरब्रह्मयोग – अर्जुन उवाच किं तद्ब्रह्म किमध्यात्मं किं पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥  भावार्थ : अर्जुन ने कहा- हे पुरुषोत्तम! वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? अधिभूत नाम से क्या कहा गया है और अधिदैव किसको कहते हैं॥1॥ अधियज्ञः कथं कोऽत्र देहेऽस्मिन्मधुसूदन । प्रयाणकाले च कथं

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ज्ञान विज्ञान योग – Gyan Vigyan Yoga – गीता अध्याय -7

गीता अध्याय -7 ज्ञान विज्ञान योग – Gyan Vigyan Yoga श्रीभगवानुवाच मय्यासक्तमनाः पार्थ योगं युञ्जन्मदाश्रयः । असंशयं समग्रं मां यथा ज्ञास्यसि तच्छृणु ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- हे पार्थ! अनन्य प्रेम से मुझमें आसक्त चित तथा अनन्य भाव से मेरे परायण होकर योग में लगा हुआ तू जिस प्रकार से सम्पूर्ण विभूति, बल, ऐश्वर्यादि गुणों

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आत्मसंयमयोग – Atmasanyam Yoga – गीता अध्याय -6

गीता अध्याय -6 आत्मसंयमयोग – Atmasanyam Yoga कर्मयोग का विषय और योगारूढ़ पुरुष के लक्षण: श्रीभगवानुवाच अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः । स सन्न्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- जो पुरुष कर्मफल का आश्रय न लेकर करने योग्य कर्म करता है, वह संन्यासी तथा योगी है और केवल

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कर्म संन्यास योग – Karma Sanyas Yoga – गीता अध्याय -5

गीता अध्याय -5 कर्म संन्यास योग – Karma Sanyas Yoga सांख्ययोग और कर्मयोग का निर्णय: अर्जुन उवाच सन्न्यासं कर्मणां कृष्ण पुनर्योगं च शंससि । यच्छ्रेय एतयोरेकं तन्मे ब्रूहि सुनिश्चितम्‌ ॥  भावार्थ : अर्जुन बोले- हे कृष्ण! आप कर्मों के संन्यास की और फिर कर्मयोग की प्रशंसा करते हैं। इसलिए इन दोनों में से जो एक मेरे

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तुलसीदास जी – Tulsidas Ji Ka Jeevan Parichay

तुलसीदासजी – Tulsidas Ji Ka Jeevan Parichay प्रयाग के पास बाँदा जिले में राणापुर नामक एक ग्राम है। वहाँ आत्माराम दुबे नाम के एक प्रतिष्ठित सरयूपारीण ब्राह्मण रहते थे। उनकी धर्मपत्नी का नाम हुलसी था। संवत्‌ 1554 की श्रावण शुक्ल सप्तमी के दिन अभुक्त मूल नक्षत्र में इन्हीं भाग्यवान दम्पति के यहाँ बारह महीने तक

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वाल्मीकि – Valmiki ji Biography

वाल्मीकि – Valmiki ji Biography शिवपुराण में कहा गया है कि दयालु मनुष्य, अभिमानशून्य व्यक्ति, परोपकारी और जितेंद्रीय ये चार पवित्र स्तंभ हैं, जो इस पृथ्वी को धारण किए हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये चारों गुण एक साथ मर्यादा पुरुषोत्तम राम के चरित्र में समाहित होकर पृथ्वी की धारण शक्ति बन गए

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ज्ञान कर्म संन्यास योग – Gyanakarma Sanyas Yoga – गीता अध्याय -4

गीता अध्याय -4 ज्ञान कर्म संन्यास योग – Gyanakarma Sanyas Yoga सगुण भगवान का प्रभाव और कर्मयोग का विषय: श्री भगवानुवाच इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम्‌ । विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाकवेऽब्रवीत्‌ ॥  भावार्थ : श्री भगवान बोले- मैंने इस अविनाशी योग को सूर्य से कहा था, सूर्य ने अपने पुत्र वैवस्वत मनु से कहा और मनु ने अपने

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कर्मयोग – Karma Yoga – गीता अध्याय -3

गीता अध्याय -3 कर्मयोग – Karma Yoga ज्ञानयोग और कर्मयोग के अनुसार अनासक्त भाव से नियत कर्म करने की श्रेष्ठता का निरूपण: अर्जुन उवाचज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन । तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ॥  भावार्थ :  अर्जुन बोले- हे जनार्दन! यदि आपको कर्म की अपेक्षा ज्ञान श्रेष्ठ मान्य है तो फिर हे केशव! मुझे भयंकर

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द्वारकाधीश यात्रा – चारो धाम और सप्तपुरियों में से एक पवित्र तीर्थ

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका  – Dwarkadhish Temple, Dwarka गुजरात का द्वारका (Dwarka in Gujrat) शहर वह स्थान है जहाँ 5000 वर्ष पूर्व भगवान कृष्ण ने मथुरा छोड़ने के बाद द्वारका (Dwarkadhish Mandir) नगरी बसाई थी और भगवान कृष्ण के राज्य की प्राचीन और पौराणिक राजधानी कहा जाता है। जिस स्थान पर उनका निजी महल ‘हरि गृह’

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व्यवसाय में वृद्धि के लिए जबरदस्त ज्योतिष उपाय

व्यवसाय में वृद्धि के लिए जबरदस्त ज्योतिष उपाय आज Business में growth के कुछ ज्योतिषीय उपायों के बारे में जानेंगे, उम्मीद है आप जरूर इन उपायों को जानकर और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल में लाकर अपना Business सफल बनायेंगे। आपको या आपके किसी परिचित या फिर किसी relative को उनकी अपनी shop या firm या